कुल्लू व मंडी में भांग की खेती पर प्रतिबंध के चलते सदियों पुराना पूला व्यवसाय अब दम तोड़ने के कगार पर पहुंच गया है. इन जिलों में सर्दियों के मौसम में हजारों परिवार अलाव के पास बैठकर पूले बनाया करते थे. इस व्यवसाय में बच्चे, महिलाएं व बूढ़े सभी बराबर की भागीदारी निभाया करते थे. मेले या अन्य धार्मिक उत्सवों पर पुरुष इन कलात्मक जुराब की तरह पहने जाने वाले पूलों को बेचा करते थे. यह व्यवसाय लोगों की मुख्य आय का साधन भी रहा है. भांग पर सरकारी प्रतिबंध के चलते पूले के लिए भांग का रेशा उपलब्ध नही होने से इस व्यवसाय पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.from Latest News हिमाचल प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/2DF6e3N
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