हिमाचल प्रदेश में मंडी जिले के सुंदरनगर निवासी पत्रकार अश्विनी सैनी को वीआईपी नंबर लेने की सनक चढ़ गई. वर्ष 2012 में लग्ज़री कार खरीदी और इसके लिए वीआईपी नंबर 0001 के लिए आवदेन कर दिया. उस वक्त प्रदेश में पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर वीआईपी नंबर दिए जाते थे. इसके लिए आवेदक से एक लाख की राशि भी ली जाती थी. सैनी 0001 नंबर के लिए एसडीएम सुंदरनगर, मंडी और देहरा के दरबार पहुंचे, लेकिन किसी ने उन्हें वीआईपी नंबर नहीं दिया.from Latest News हिमाचल प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/2QyHUs3
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