हिमाचल प्रदेश के कुल्लू की एक महिला में अपने 15 साल के शोध के परिणामस्वरूप बेमौसमी गेहूं की फसल को उगाने में कामयाबी हासिल की है. दिलचस्प पहलू यह है कि उन्होंने अपने नाम के साथ ही इसका नाम भी संतोषी गेहूं 1972 रखा है. संतोष शर्मा ने इस प्रयोग को भलाण-2 डोला सिंह ठाकुर के खेतों में उपजाया है. 15 विस्वा भूमि पर जब 5 किलो गेहूं को बोया गया तो इसके आशातीत परिणाम सामने आए हैं. 14 जून को इस बीज की बिजाई की गई थी. 30 सितंबर तक फसल पूरी तरह से पककर तैयार हो गई है. अब इसकी थ्रेसिंग में 70 किलो गेहूं की पैदावार की है.from Latest News हिमाचल प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/2U6FyP7
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